phir ek baarish!!

saavan

आज फिर घिर आये ये मनमाने बादल
मेरी कभी सुनते ही नहीं
बिल्कुल मेरी प्रेयसी पर गए है
खेर उसकी तरह इनसे भी कब तक बचूँगा
चलो आज भींग ही जाता  हूँ
इन के भी प्यार में !!

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