Happy Diwali, Really???

 

तुम कहते हो हैप्पी दिवाली!!

हम कहते है क्या ख़ाक दिवाली ??

राम के घर आने की क्या खुशिया मनाये

जब खुद अपने घर हम पहुच न पाए?

Diabetes और गरीबी से भरे इस देश में

क्यों मिठाई पे पैसे उडाये??

हमारी सीता तो सालों से हमसे दूर है

हम कौन सी लंका जलाये?

क्या ये बेहतेर न होता की हम सब राम बन जाते

अपने पास मोजूद रावणों को हम खुद ही मार गिराते

फिर ना गरीबी होती न भ्रष्टाचार

ना अन्याय होता ना मारामार

हर तरफ खुशहाली होती,हर घर में हर दिन दिवाली होती

दियो की तब जरुरत न होती, मन में ही प्रकाश की प्याली होती

इस दिवाली से एक नयी दिवाली को ओर !!!

 

 

 

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